तप रही दिल्ली: 10 साल में 7 डिग्री बढ़ा पारा, 'अर्बन हीट आइलैंड' के संकट में राजधानी

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में गर्मी अब केवल मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि एक गंभीर संकट बन चुकी है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (CSE) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में दिल्ली के तापमान में 7 डिग्री सेल्सियस तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साल 2014 की मई में जो पारा 33 डिग्री के आसपास रहता था, वह 2024 में 40 डिग्री को पार कर चुका है। अनुमान है कि इस साल 24 अप्रैल तक तापमान 43 डिग्री के ऊपर जा सकता है।

क्या है 'अर्बन हीट आइलैंड' का खतरा?

जब कोई शहर अपनी बनावट और मानवीय गतिविधियों के कारण ग्रामीण इलाकों की तुलना में कहीं अधिक गर्म हो जाता है, तो उसे 'अर्बन हीट आइलैंड' कहते हैं। दिल्ली के साथ भी यही हो रहा है:

  • कंक्रीट का जाल: साल 2003 में दिल्ली के 31% हिस्से पर निर्माण था, जो अब 40% से ज्यादा हो चुका है। ये कंक्रीट की इमारतें दिनभर गर्मी सोखती हैं और रात में उसे बाहर निकालती हैं, जिससे रातें भी गर्म रहने लगी हैं।
  • घटती हरियाली: विकास के नाम पर बड़े पेड़ों की जगह झाड़ियों ने ले ली है, जिससे प्राकृतिक शीतलता कम हो गई है।
  • अन्य कारण: वाहनों का धुआं, एसी (AC) से निकलने वाली गर्मी और जल स्रोतों का सूखना तापमान बढ़ा रहे हैं।

उमस भरी गर्मी: अधिक जानलेवा

विशेषज्ञों का मानना है कि लू की चेतावनी केवल तापमान पर आधारित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें 'महसूस होने वाली गर्मी' (Heat Index) को भी शामिल करना चाहिए। शुष्क गर्मी के मुकाबले उमस भरी गर्मी ज्यादा खतरनाक होती है क्योंकि इसमें पसीना नहीं सूखता, जिससे शरीर का आंतरिक तापमान तेजी से बढ़ता है और स्वास्थ्य बिगड़ सकता है।

बचाव के उपाय: कैसे मिलेगी राहत?

बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विशेषज्ञों ने कुछ सुझाव दिए हैं:

  • हरियाली बढ़ाना: बड़े छायादार वृक्ष लगाए जाएं।
  • कूल रूफ तकनीक: छतों पर सफेद चूने या रिफ्लेक्टिव पेंट की पुताई कराएं।
  • ऊर्जा की बचत: एसी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सीमित व समझदारी से उपयोग करें।
  • जल संरक्षण: पुराने जल निकायों को पुनर्जीवित करें।