दुनिया की खूनी नदियां: कहीं प्राकृतिक वजह तो कहीं प्रदूषण से लाल हुआ पानी
नई दिल्ली। नदियां मानव सभ्यता की जीवनरेखा रही हैं, लेकिन दुनिया में कुछ ऐसी नदियां भी हैं जिनका पानी खून की तरह सुर्ख लाल दिखाई देता है। कहीं यह रंग प्राकृतिक खनिजों के कारण है तो कहीं औद्योगिक प्रदूषण ने नदी का रंग बदल दिया। वर्षों से इन नदियों को लेकर रहस्य और लोककथाएं प्रचलित रही हैं, लेकिन वैज्ञानिक अध्ययनों ने इनके पीछे के वास्तविक कारणों को सामने रखा है। बिहार के रोहतास जिले के जंगलों में बहने वाली खूनी (खूनिया) नदी अपने लाल रंग के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित करती है। दरअसल, इस क्षेत्र की चट्टानों में लौह अयस्क (आयरन) की अधिकता है। पानी में घुला आयरन हवा के संपर्क में आकर ऑक्सीकरण (ऑक्सीडेशन) की प्रक्रिया से गुजरता है, जिससे नदी का पानी लाल या नारंगी दिखाई देता है।
इसी तरह ब्रह्मपुत्र को भी कई स्थानों पर रेड रिवर कहा जाता है। मानसून के दौरान पहाड़ों से बहकर आने वाली लाल मिट्टी और लौह तत्वों के कारण इसके पानी का रंग गहरा लाल-भूरा हो जाता है। अरुणाचल प्रदेश की लेहित नदी में भी हिमालयी चट्टानों में मौजूद आयरन ऑक्साइड के कारण पानी लालिमा लिए दिखाई देता है।
दूसरी ओर, दुनिया के कई देशों में नदियों का रंग प्रदूषण के कारण अचानक लाल हो गया। वर्ष 2016 में रूस की डल्डिकिन नदी निकेल संयंत्र से रासायनिक कचरे के रिसाव के कारण लाल हो गई थी। वहीं इस्कितिम्का नदी का रंग भी औद्योगिक प्रदूषण के चलते बदलने की आशंका जताई गई थी।
अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स के निकट स्थित सारंडी धारा का पानी भी अचानक लाल हो गया था। जांच में औद्योगिक रसायनों, विशेष रूप से रंग और दवाओं में प्रयुक्त रसायनों की मौजूदगी की आशंका सामने आई। इसी प्रकार वर्ष 2014 में चीन के झेजियांग प्रांत में एक नदी का पानी कुछ ही समय में लाल हो गया। जांच एजेंसियों ने इसे अवैध रूप से औद्योगिक अपशिष्ट नदी में छोड़े जाने का परिणाम बताया।
विशेषज्ञों के अनुसार, लाल रंग वाली सभी नदियां किसी रहस्यमयी शक्ति का परिणाम नहीं हैं। अधिकांश मामलों में इसके पीछे प्राकृतिक खनिज, मिट्टी में मौजूद लौह तत्व या फिर औद्योगिक प्रदूषण जैसे वैज्ञानिक कारण जिम्मेदार होते हैं। ये घटनाएं जहां प्रकृति की विविधता को दर्शाती हैं, वहीं जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने की आवश्यकता की भी याद दिलाती हैं।

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