सिर्फ तुलसी-बेला ही नहीं...ये फूल भी प्रभु जगन्नाथ को अतिप्रिय
काशी का रथयात्रा मेला शुरू होने वाला है. 16 जुलाई से इस तीन दिवसीय मेले का आगाज होगा. प्रभु जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ रथ पर सवार होंगे. सिर्फ काशी ही नहीं बल्कि देश के अलग-अलग जगहों पर प्रभु जगन्नाथ का यह उत्सव देखने को मिलेगा. वैसे तो भक्त प्रभु को प्रसन्न करने के लिए उन्हें तुलसी और सफेद बेले की माला के साथ नानखटाई अर्पित करते हैं, लेकिन शास्त्रों में कुछ और ऐसे फूल भी बताएं गए हैं जिससे आप प्रभु जगन्नाथ को प्रसन्न कर मनोवांछित फल को प्राप्त कर सकते हैं. काशी के ज्योतिषाचार्य पंडित संजय उपाध्याय लोकल 18 से बताते हैं कि बिना तुलसी के जगत के पालन हार भगवान जगन्नाथ का भोग अधूरा है, लेकिन यदि उन्हें कुमकुम के रंग वाले कमल के 100 पुष्प या उसके 100 पत्ते अर्पित किया जाएं तो इससे भी वो अतिशीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं. इससे मनुष्य के मोक्ष का मार्ग खुल जाता है. जीवन में आने वाली अनजान आफत दूर रहती है.
स्वर्ण दान का मिलेगा फल
यदि मनुष्य रथयात्रा के दौरान प्रभु जगन्नाथ को कुंभी पुष्प अर्पित करता है तो उसे स्वर्ण दान के बराबर फल की प्राप्ति होती है. धन-ऐश्वर्य और सुख समृद्धि भी मिलती है. यदि आप अपने सात जन्मों के पापों को नष्ट करना चाहते हैं तो प्रभु जगन्नाथ की पूजा-आराधना के दौरान केतकी का फूल उन्हें जरूर अर्पित करें. यह पुष्प भी उन्हें तुलसी के सामान ही अतिप्रिय है.
मोगरा भी अतिप्रिय
पंडित संजय उपाध्याय बताते हैं कि उन्हें मगरई या मोगरा का सफेद पुष्प भी अतिप्रिय है. भक्त अपनी मनोवांछित मनोकामना की पूर्ति के साथ प्रभु जगन्नाथ को इसका पुष्प या 108 पुष्पों से बनी माला अर्पित कर सकते हैं. आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से प्रभु जगन्नाथ के रथयात्रा का उत्सव शुरू होता है. 9 दिनों तक इस महाउत्सव को भक्त मनाते हैं. रथ पर सवार प्रभु के दर्शन के लिए लाखों भक्त पुरी के साथ काशी भी आते हैं. काशी में रथयात्रा का उत्सव तीन दिनों तक ही चलता है. हालांकि देश के अलग-अलग जगहों पर होने वाली रथयात्रा 3 से 9 दिनों का होती है. अलग-अलग शहरों की परंपरा के अनुसार ये उत्सव मनाया जाता है.

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