ऐतिहासिक गिरावट: रुपया 95.20 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँचा, कच्चे तेल और डॉलर की मजबूती ने बिगाड़ा खेल

मुंबई: विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत होते ही भारतीय रुपये में 32 पैसे की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। रुपया 95.20 के सर्वकालिक निचले स्तर पर जा गिरा है। मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे आर्थिक केंद्रों के विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव और डॉलर की बढ़ती मांग ने रुपये की स्थिति नाजुक कर दी है।

डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व का रुख

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.01 पर खुलने के बाद संभल नहीं पाया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती न करने के संकेत और सुरक्षित निवेश के लिए डॉलर की ओर निवेशकों के झुकाव से डॉलर इंडेक्स 98.96 पर पहुँच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते कूटनीतिक विवाद ने वैश्विक निवेशकों में घबराहट पैदा कर दी है।

कच्चे तेल का संकट और आपूर्ति की चिंता

कच्चे तेल की कीमतें 122 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँच गई हैं, जिसका सीधा असर भारत की आयात लागत पर पड़ रहा है। चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद जैसे शहरों के उद्योग जगत में इस बात को लेकर चिंता है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति बाधित रहती है, तो आने वाले दिनों में ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।

शेयर बाजार में हाहाकार और निवेशकों का पलायन

रुपये की गिरावट का सीधा असर घरेलू शेयर बाजार पर भी देखने को मिला:

  • सेंसेक्स: शुरुआती सत्र में 821.79 अंक टूटकर 76,674.57 के स्तर पर आ गया।

  • निफ्टी: 287.3 अंक फिसलकर 23,890.35 पर कारोबार करता दिखा।

  • FII की निकासी: विदेशी निवेशकों ने पिछले सत्र में करीब 2,468 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जिससे अहमदाबाद, पुणे और गुरुग्राम के ट्रेडिंग सेंटर्स में बिकवाली का दबाव बढ़ गया है।

आर्थिक प्रभाव और भविष्य की चुनौतियां

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, रुपये में अभी और गिरावट की संभावना बनी हुई है। कच्चे तेल के बढ़ते दाम न केवल मुद्रास्फीति (महंगाई) को बढ़ावा देंगे, बल्कि देश के चालू खाता घाटे (CAD) पर भी बुरा असर डालेंगे। इंदौर, भोपाल और लखनऊ जैसे शहरों के बाजारों में भी इस वैश्विक उथल-पुथल का असर महंगाई के रूप में महसूस किया जा सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।