अस्पताल में सेवाएं प्रभावित, 21 कर्मचारियों की नौकरी जाने पर बढ़ा विवाद
भोपाल। राजधानी के प्रतिष्ठित जयप्रकाश (जेपी) अस्पताल में जिला रोगी कल्याण समिति के तहत दशकों से कार्यरत 21 संविदा व दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की सेवाएं अचानक समाप्त किए जाने के बाद भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है। शुक्रवार को आक्रोशित कर्मचारियों ने अस्पताल परिसर में जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। इस दौरान 58 वर्षीय एम्बुलेंस चालक रमेश शर्मा ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि यह केवल नौकरी से निकाला जाना नहीं, बल्कि उनकी ज़िंदगी ख़त्म करने जैसा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे अस्पताल के गेट नंबर-21 के सामने आत्मदाह कर लेंगे।
बिना किसी नोटिस और कारण के सेवा समाप्ति का आरोप
पीड़ित कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि 22 जुलाई को रोज की तरह सुबह ड्यूटी पर आने के बाद लगभग 11 बजे उन्हें अचानक सेवा समाप्ति का फरमान थमा दिया गया। हटाए गए स्टाफ में लैब टेक्नीशियन, वाहन चालक, फार्मासिस्ट और कंप्यूटर ऑपरेटर शामिल हैं, जो बीते 20 से 25 वर्षों से अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे थे। कर्मचारियों का कहना है कि प्रबंधन ने उन्हें हटाने के लिए वर्ष 2019 के एक शासनादेश का हवाला दिया है, जबकि वह आदेश नई भर्तियों पर रोक लगाने के लिए था, न कि दशकों पुराने अनुभवी कर्मचारियों को निकालने के लिए।
हार्ट अटैक से पीड़ित एम्बुलेंस चालक पर आर्थिक संकट, वेतन कटौती की भी शिकायत
वर्ष 1999 से अस्पताल में सेवाएं दे रहे और कोरोना काल में फ्रंटलाइन वर्कर की भूमिका निभाने वाले एम्बुलेंस चालक रमेश शर्मा ने बताया कि हाल ही में उन्हें हार्ट अटैक आया था और डॉक्टरों ने दो हफ्ते में एंजियोप्लास्टी कराने का परामर्श दिया है। इस बीमारी के दौर में आजीविका छीन जाने से उनके सामने जीवन-मरण का संकट खड़ा हो गया है। इसके अलावा, अन्य कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन बायोमीट्रिक हाजिरी या नाइट ड्यूटी के बाद मिले नियमानुसार अवकाश को भी अनुपस्थिति मानकर हर महीने उनके 14-15 हजार रुपये के मानदेय में से 8 से 10 दिनों की भारी कटौती करता आ रहा था।
अस्पताल की व्यवस्था चरमराई, कर्मचारी संगठन ने दी भूख हड़ताल की चेतावनी
21 अनुभवी कर्मचारियों को हटाए जाने के तुरंत बाद जेपी अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होने लगी हैं। पंजीयन काउंटरों पर मरीजों को पर्चा बनवाने के लिए घंटों कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है, वहीं फार्मेसी विभाग में स्टाफ की किल्लत के चलते इंटर्न छात्रों से दवा वितरण का काम कराया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र शर्मा ने पीड़ित कर्मचारियों का खुलकर समर्थन किया है और चेतावनी दी है कि यदि बर्खास्त स्टाफ की तत्काल बहाली नहीं की गई, तो उग्र आंदोलन और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की जाएगी।

गुरुग्राम में RWA पदाधिकारियों पर शिकंजा, कार्यालय में बवाल के बाद FIR
इराक से वेस्ट बैंक तक हिंसा, धमाकों और गोलीबारी से फिर भड़का तनाव
बैठक खत्म, सहमति नहीं; कल फिर आमने-सामने होंगे सरकार और CJP
अस्पताल में सेवाएं प्रभावित, 21 कर्मचारियों की नौकरी जाने पर बढ़ा विवाद
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, विवाहित बेटियों को भी मिलेगा अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार